आनंदपुर साहिब-नैना देवी और पठानकोट-डलहौजी रोप-वे की स्थापना पर पंजाब-हिमाचल सहमत

चंडीगढ़, 29 मार्च । पंजाब व हिमाचल सरकारों के बीच दोनों राज्यों को जोड़ने वाले रोप-वे बनाने पर सहमति हो गई है। इससे दोनों राज्यों के पर्यटकों व श्रद्धालुओं को भारी लाभ होगा। हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने बुधवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ चंडीगढ़ में मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री मान ने आनंदपुर साहिब और नैना देवी के बीच रोप-वे की बात की, जिससे दोनों राज्यों को लाभ मिल सके।

उन्होंने कहा कि रोपवे से लाखों तीर्थयात्री इन दोनों ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की यात्रा कर सकेंगे। दोनों मुख्यमंत्री इस बात पर सहमत हुए कि इस योजना से दोनों तीर्थ स्थलों पर जाने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा में आसानी होगी।

दोनों मुख्यमंत्री ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पठानकोट-डलहौजी रोपवे परियोजना स्थापित करने पर भी सहमति दी। उन्होंने कहा कि पर्यटकों को सुविधा देने के अलावा, यह दोनों राज्यों के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में भी मददगार होगा। उन्होंने इस क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं पर भी जोर देते हुए कहा कि पर्यटन की सुविधा के लिए संयुक्त रूप से काम करना दोनों राज्यों के हित में है।

भगवंत मान ने हिमाचल प्रदेश की तरफ से हाईड्रो पावर प्लांट पर प्रस्तावित वाटर सेस लगाने का मुद्दा सुखविंदर सुक्खू के समक्ष उठाया। मान ने कहा कि इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यह राज्य के हितों के खिलाफ है। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वाटर सेस केवल उनके अपने राज्य में पन-बिजली प्लांटो पर ही लगाया जाएगा और कहा कि यह पंजाब में लागू नहीं होगा।

इस मुद्दे को हल करने के लिए, दोनों मुख्यमंत्रियों ने कहा कि दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और ऊर्जा सचिव हर पखवाड़े बैठक करेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राज्यों में कोई झगड़ा न हो। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के उच्च अधिकारी आपसी सहयोग से राज्यों के सामने आने वाले मुद्दों का समाधान करेंगे। उन्होंने दोनों राज्यों के लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग पर सहमति व्यक्त की। बिजली क्षेत्र में भी दोनों राज्यों के बीच आपसी सहयोग की मांग की गई। कहा कि हिमाचल प्रदेश पीक सीजन में अपनी अतिरिक्त बिजली पंजाब को बेच सकता है। भगवंत मान ने कहा कि इससे राज्य में धान के मौसम में बिजली की समस्या को दूर करने में काफी मदद मिलेगी।