पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट से अमृतपाल के वकीलों को फटकार

चंडीगढ़, 6 अप्रैल । पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने खालिस्तान समर्थक अमृतपाल के वकीलों को फटकार लगाते हुए कहा है कि आरोपित इस समय असम की जेल में हैं और पुलिस इस बारे में अधिकृत रूप से बता चुकी है। इसके बावजूद बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के माध्यम से वारंट आफिसर नियुक्त करने की मांग का कोई औचित्य नहीं है।

अमृतपाल सिंह के वकील इमान सिंह खैहरा की तरफ से अमृतपाल समर्थक प्रधानमंत्री बाजेके समेत पांच लोगों के बारे में दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान यह कार्रवाई हुई है। वारिस पंजाब दे संस्था के लीगल एडवाइजर ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी। इसमें अमृतपाल के साथ असम की डिब्रूगढ़ जेल भेजे गए प्रधानमंत्री बाजेके का नाम भी शामिल था। इसी मुद्दे को लेकर गुरुवार को सुनवाई हुई तो हाई कोर्ट ने कहा कि बाजेके पर एनएसए लगा हुआ है। वह असम की जेल में है। यह भी आपको पता है, फिर किस आधार पर यह बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की गई है।

किस आधार पर असम जेल की लेडी सुपरिटेंडेंट को इसमें बाई नेम पार्टी बनाया गया है। क्या वकील को बेसिक कानून की भी जानकारी नहीं है। वकील ने बचाव में कहा कि वह डिब्रूगढ़ जेल में बंद है और उससे मिलना चाहते हैं। इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि वह किसी दूसरे मजिस्ट्रेट के पास गए। असम हाई कोर्ट क्यों नहीं गए। हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि उनकी याचिका का आधार ठीक नहीं है। अब इस मामले की भी अमृतपाल मामले के साथ 11 अप्रैल को फिर सुनवाई होगी।