भिवानी, 30 अप्रैल । पिछड़ा वर्ग से संबंधित विभिन्न मांगों की तरफ सरकार की अनदेखी से गुस्साएं पिछड़ा वर्ग लोगों ने चरणबद्ध आंदोलन की कड़ी में राष्ट्रीय पिछड़ वर्ग मोर्चा द्वारा रविवार को भारत बंद के आह्वान के तहत देश भर के जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इसी कड़ी में भिवानी में भी पिछड़ा वर्ग से जुड़े लोगों ने शहर में प्रदर्शन किया तथा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के माध्यम से पिछड़ा वर्ग के लोगों ने ओबीसी की जाति आधारित जनगणना करवाए जाने, ईवीएम मशीन को हटाए जाने, निजी क्षेत्रों में एससी, एसटी, ओबीसी आरक्षण लागू किए जाने, एनआरसी, एनपीआर, सीएए के विरोध, पुरानी पेंशन बहाल किए जाने, श्रम कानून को हटाए जाने, बैकलॉग तत्काल भरा जाने, ओबीसी से क्रीमिलेयर को समाप्त किए जाने सहित अन्य मांगें रखी।
इस मौके पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए श्रीदक्ष प्रजापति महासभा के प्रधान सुरेश प्रजापति ने कहा कि जब वोट लेने की बारी आती है तो कोई भी राजनीतिक पार्टी पिछड़ा वर्ग को एक बड़े वोट बैंक के रूप में देखती है, लेकिन जब उनके अधिकारों की बात आती है तो सभी राजनीतिक पार्टियां आंख मूंद लेती है, जिसके विरोध में अब पिछड़ा वर्ग लोगों का सब्र का बांध टूट गया है तथा वे संघर्ष के मूढ़ में है।
इस मौके पर इंडियन मेडिकल प्रोफेशन एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद सांगा ने कहा कि संविधान संख्या के सिद्धांत को मानता है, मगर केंद्र सरकार पिछड़े वर्ग की गिनती ना करवाकर संविधान के साथ खिलवाड़ करने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस देश में जानवरों की भी गिनती होती है, लेकिन पिछड़े वर्ग के लोगों की गिनती नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जान-बूझकर पिछड़े वर्ग की गिनती नहीं करवा रही, क्योंकि सरकार जानती है की यदि पिछड़े वर्ग को संख्या का पता चलेगा तो वे भी संख्या के अनुपात में हिस्सेदारी मांगेंगे तथा वो हिस्सेदारी ना देनी पडे, इसीलिए सरकार जाति आधारित जनगणना करवाने में आनाकानी कर रही है।